एक तिनका है बहुत तेरे लिए …….

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मुंबई  –  महाराष्ट्र  –  भारत           अप्रैल ३, २०१६           अपराह्न  २.२०

 

 

………………………… एक तिनका है बहुत तेरे लिए ……………………………

मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ।

एक दिन जब था मुँडेरे पर खड़ा।

आ अचानक दूर से उड़ता हुआ।

एक तिनका आँख में मेरी पड़ा ।। 1 ।।

मैं झिझक उठा, हुआ बेचैन सा।

लाल होकर आँख भी दुखने लगी।

मूँठ देने लोग कपड़े की लगे।

ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी ।। 2।।

जब किसी ढब से निकल तिनका गया।

तब ‘समझ’ ने यों मुझे ताने दिये।

ऐंठता तू किसलिए इतना रहा।

एक तिनका है बहुत तेरे लिए ।। 3 ।।

………………………….. अयोध्या सिंह उपाध्याय “हरिऔध” …………………………..

 

[ कवि श्री अयोध्या सिंह उपाध्याय “हरिऔध” की कविता साभार उद्धृत ]

 

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