खतरे का उदघोष बजा है , रणभूमी तैयार करो !!

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मुंबई  –  महाराष्ट्र  –  भारत          फरवरी २८ , २०१६           अपराह्न ०२.४०

 

खतरे का उदघोष बजा है,रणभूमी तैयार करो,
सही वक्त है,चुन चुन करके,गद्दारों पर वार करो,

आतंकी दो चार मार कर हम खुशियों से फूल गए,
सरहद की चिंताओं में हम घर के भेदी भूल गए,

सरहद पर कांटे हैं,लेकिन घर के भीतर नागफनी,
जिनके हाथ मशाले सौंपी,वो करते है आगजनी,

ये भारत की बर्बादी के कसे कथानक लगते हैं,
सच तो है दहशतगर्दों से अधिक भयानक लगते हैं,

संविधान ने सौंप दिए हैं अश्त्र शस्त्र आज़ादी के,
शिक्षा के परिसर में नारे भारत की बर्बादी के,

अफज़ल पर तो छाती फटती देखी है बहुतेरों की,
मगर शहादत भूल गए हैं सियाचीन के शेरों की,

जिस अफज़ल ने संसद वाले हमले को अंजाम दिया,
जिस अफज़ल को न्यायालय ने आतंकी का नाम दिया,

उस अफज़ल की फांसी को बलिदान बताने निकले हैं,
और हमारे ही घर में हमको धमकाने निकले हैं,

बड़ी विदेशी साजिश के हथियार हमारी छाती पर,
भारत को घायल करते गद्दार हमारी छाती पर,

नाम कन्हैया रखने वाले,कंस हमारी छाती पर,
माल उड़ाते जयचंदों के वंश हमारी छाती पर,

लोकतंत्र का चुल्लू भर कर डूब मरो तुम पानी में,
भारत गाली सह जाता है खुद अपनी रजधानी में,

आज वतन को,खुद के पाले घड़ियालों से खतरा है,
बाहर के दुश्मन से ज्यादा घर वालो से खतरा है,

देशद्रोह के हमदर्दी हैं,तुच्छ सियासत करते है,
और वतन के गद्दारों की खुली वकालत करते है,

वोट बैंक की नदी विषैली,उसमे बहने वाले हैं,
आतंकी इशरत को अपनी बेटी कहने वाले हैं,

सावधान अब रहना होगा वामपंथ की चालों से,
बच कर रहना टोपी पहने ढोंगी मफलर वालों से,

राष्ट्रवाद के रखवालों मत सत्ता का उपभोग करो,
दिया देश ने तुम्हे पूर्ण,उस बहुमत का उपयोग करो,

हम भारत के आकाओं की ख़ामोशी से चौंके हैं,
एक शेर के रहते कैसे कुत्ते खुलकर भौंके हैं,

मन की बाते बंद करो,मत ज्ञान बाँटिये मोदी जी,
सबसे पहले गद्दारों की जीभ काटिये मोदी जी,

नहीं तुम्हारे बस में हो तो,हमें बोल दो मोदी जी,
संविधान से बंधे हमारे हाथ खोल दो मोदी जी,

अगर नही कुछ किया,समूचा भार उठाने वाले हैं,
हम भारत के बेटे भी हथियार उठाने वाले हैं,

 

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श्री अवनीश बरनवाल जी के व्हाट्सऐप से साभार उद्धृत

 

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आस्तीनों में चलो साँप ही पाले जाएँ ……

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मुंबई  –  महाराष्ट्र  –  भारत           फरवरी २१ , २०१६           रात्रि ११ . २०

 

इन्तेज़ामात नए सिरे से संभाले जाएँ ,
जितने कमजर्फ हैं महफ़िल से निकाले जाएँ ।

मेरा घर आग की लपटों में छुपा है लेकिन ,
जब मज़ा है तेरे आँगन में उजाले जाएँ ।

गम सलामत हैं तो पीते ही रहेंगे लेकिन ,
पहले मयखाने के हालात संभाले जाएँ ।

खाली वक्तों में कहीं बैठ के रो लें यारों ,
फुरसतें हैं तो समंदर ही खंगाले जाएँ ।

खाक में यों ना मिला ज़ब्त की तौहीन ना कर ,

ये वो आसूं हैं जो दुनिया को बहा ले जाएँ ।

हम भी प्यासे हैं ये अहसास तो हो साकी को ,
खाली शीशे ही हवाओं में उछाले जाएँ ।

आओ शहर में नए दोस्त बनाएं “राहत” ,
आस्तीनों में चलो साँप ही पाले जाएँ ।

…………………………………. राहत इन्दौरी …………………………………..

 

[ श्री राहत इन्दौरी की उर्दू  ग़ज़ल साभार उद्धृत ]

 

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चले चलो कि जहाँ तक ये आसमान रहे ……..

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मुंबई  –  महाराष्ट्र  –  भारत           जनवरी , 31 , 2016            रात्रि 10.50

 

———————————————————————
सफ़र की हद है वहां तक कि कुछ निशान रहे ,
चले चलो कि जहाँ तक ये आसमान रहे |
ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल ,
मज़ा तो तब है कि पैरों में कुछ थकान रहे |
वो शख्स मुझ को कोई जालसाज़ लगता हैं ,
तुम उसको दोस्त समझते हो फिर भी ध्यान रहे |

मुझे ज़मीं की गहराइयों ने दबा लिया ,
मैं चाहता था कि मेरे सर पे आसमान रहे |

अब अपने बीच मरासिम नहीं अदावत है ,
मगर ये बात हमारे ही दरमियाँ रहे |

सितारों की फसलें उगा ना सका कोई ,
मेरी ज़मीं पे कितने ही आसमान रहे |

वो एक सवाल है फिर उसका सामना होगा ,
दुआ करो कि सलामत मेरी ज़बान रहे ||

———————————————————————

 

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भारत की संस्कृति

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मुंबई  –  महाराष्ट्र  –  भारत           जनवरी 24 , 2016           सायम् 07.40

 

 

📜अपने भारत की संस्कृति को पहचानें। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचायें।

खासकर अपने बच्चों को बताएं
क्योंकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा…

📜😇 दो पक्ष

===========

कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !

📜😇 तीन ऋण

=============

देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !

📜😇 चार युग

===============

सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !

📜😇 चार धाम

===============

द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !

📜😇 चारपीठ

===============

शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !

📜😇 चार वेद

============

ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !

📜😇 चार आश्रम

================

ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !

📜😇 चार अंतःकरण

===============

मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !

📜😇 पञ्च गव्य

================

गाय का घी ,
गाय का दूध ,
गाय के दूध की दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !

📜😇 पञ्च देव

============

गणेश ,
विष्णु ,
शिव ,
देवी ,
सूर्य !

📜😇 पंच तत्त्व

==============

पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !

📜😇 छह दर्शन [ षड दर्शन ]

========================

वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मीमांसा
दक्षिण मीमांसा !

📜😇 सप्त ऋषि

==================

विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भारद्वाज ,
गौतम ,
अत्रि  ,
वशिष्ठ ,
कश्यप!

📜😇 सप्त पुरी

===========

अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची ( शिन कांची – विष्णु कांची ) ,
अवंतिका ( उज्जैन ) ,
द्वारिका पुरी !

📜😊 आठ योग [ अष्टांग योग ]

=========================

यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान ,

समाधि !

📜😇 आठ लक्ष्मी

=================

आग्घ ,
विद्या ,
सौभाग्य ,
अमृत ,
काम ,
सत्य ,
भोग ,
योग लक्ष्मी !

📜😇 नव दुर्गा

================

शैल पुत्री ,
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा ,
कुष्मांडा ,
स्कंदमाता ,
कात्यायिनी ,
कालरात्रि ,
महागौरी ,
सिद्धिदात्री !

📜😇 दस दिशाएं

===============

पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान कोण – ( पूर्व उत्तर कोण ) ,
नैऋत्य कोण – ( पूर्व दक्षिण कोण ) ,
वायव्य कोण – ( पश्चिम उत्तर कोण )  ,
अग्नि कोण – ( पश्चिम दक्षिण कोण ) ,
आकाश ,
पाताल !

📜😇 १० अवतार  [ दशावतार ]

=======================

मत्स्य ,
कच्छप ,
वराह ,
नरसिंह ,
वामन ,
परशुराम ,
श्री राम ,
श्री कृष्ण ,
बुद्ध ,
कल्कि !

📜😇 बारह मास [ द्वादश मास ]

=========================

चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !

📜😇 बारह राशि  [ द्वादश राशि ]

========================

मेष ,
वृषभ ,
मिथुन ,
कर्क ,
सिंह ,
कन्या ,
तुला ,
वृश्चिक ,
धनु ,
मकर ,
कुंभ ,
कन्या !

📜😇 बारह ज्योतिर्लिंग [ द्वादश ज्योतिर्लिंग ]

===================================

सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल ,
ओमकारेश्वर ,
बैजनाथ ,
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ ,
त्र्यंबकेश्वर ,
केदारनाथ ,
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !

📜😇 पंद्रह तिथियाँ

==============

प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा / अमावस्या !

📜😇 स्मृतियां

==========

मनु ,
विष्णु ,
अत्रि  ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगिरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
वृहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !

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किसान का गधा : आगे बढ़ते जाना है !!

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मुंबई  –  महाराष्ट्र  –  भारत           जनवरी , 10 , 2016           प्रातः 11.45

 

एक दिन एक किसान का गधा कुएँ में गिर गया । वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका था, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था; और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।
किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है , वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा । और फिर , अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।


सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।


जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एस सीढी ऊपर चढ़ आता । जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह गधा कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।


ध्यान रखे, आपके जीवन में भी आप पर बहुत तरह की मिट्टी फेंकी जायेगी , बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी। जैसे कि , आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा , कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा । कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे। ऐसे में आपको हतोत्साहित होकर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख लेकर, उसे सीढ़ी बनाकर, बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है ।

[ श्री  Shoeb Chishti  के फेसबुक से साभार उद्धृत ]

 

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इक्ष्वाकु वंश / रघु वंश / रघु कुल / प्रभु श्री राम का कुल

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मुंबई  –  महाराष्ट्र  –  भारत           दिसंबर 27 , 2015           सायम् 06.40

 

कभी सोचा है की प्रभु श्री राम के दादा – परदादा का नाम क्या था? नहीं तो जानिये-
1 – ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 – मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 – कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 – विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए । वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 – वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुल की स्थापना की |
6 – इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 – कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 – विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 – बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भगीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.
24- भगीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे ।
25- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
26- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
27- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
28- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
29- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
30- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
31- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
32- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
33- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
34- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
35- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
36- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए,
  इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ l

 

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बहुत अच्छी जानकारी ….. दो महान देशभक्तों ( ? ) की कहानी….

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मुंबई  –  महाराष्ट्र  –  भारत           दिसंबर 20 , 2015           अपराह्न  02.20

 

……………………. बहुत अच्छी जानकारी ………………….

👉ये है देश के दो बड़े महान देशभक्तों ( ? ) की कहानी ………….

👉जनता को नहीं पता है कि भगत सिंह के खिलाफ विरुद्ध गवाही देने वाले दो व्यक्ति कौन थे । जब दिल्ली में भगत सिंह पर अंग्रेजों की अदालत में असेंबली में बम फेंकने का मुकद्दमा चला तो …………

👉 भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त के खिलाफ शोभा सिंह ने गवाही दी और दूसरा गवाह था शादी लाल !

👉 दोनों को वतन से की गई इस गद्दारी का इनाम भी मिला। दोनों को न सिर्फ सर की उपाधि दी गई बल्कि और भी कई दूसरे फायदे मिले।

👉 शोभा सिंह को दिल्ली में बेशुमार दौलत और करोड़ों के सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके मिले आज कनौट प्लेस में सर शोभा सिंह स्कूल में कतार लगती है बच्चो को प्रवेश नहीं मिलता है जबकि …………..

👉 शादी लाल को बागपत के नजदीक अपार संपत्ति मिली। आज भी श्यामली में शादी लाल के वंशजों के पास चीनी मिल और शराब कारखाना है।

👉 सर शादीलाल और सर शोभा सिंह, भारतीय जनता कि नजरों मे सदा घृणा के पात्र थे और अब तक हैं ।

👉 लेकिन शादी लाल को गांव वालों का ऐसा तिरस्कार झेलना पड़ा कि उसके मरने पर किसी भी दुकानदार ने अपनी दुकान से कफन का कपड़ा तक नहीं दिया।

👉 शादी लाल के लड़के उसका कफ़न दिल्ली से खरीद कर लाए तब जाकर उसका अंतिम संस्कार हो पाया था।

👉शोभा सिंह खुशनसीब रहा। उसे और उसके पिता सुजान सिंह (जिसके नाम पर पंजाब में कोट सुजान सिंह गांव और दिल्ली में सुजान सिंह पार्क है) को राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में हजारों एकड़ जमीन मिली और खूब पैसा भी।

👉 शोभा सिंह के बेटे खुशवंत सिंह ने शौकिया तौर पर पत्रकारिता शुरु कर दी और बड़ी-बड़ी हस्तियों से संबंध बनाना शुरु कर दिया।

👉सर शोभा सिंह के नाम से एक चैरिटबल ट्रस्ट भी बन गया जो अस्पतालों और दूसरी जगहों पर धर्मशालाएं आदि बनवाता तथा मैनेज करता है।
👉 आज दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास बाराखंबा रोड पर जिस स्कूल को मॉडर्न स्कूल कहते हैं वह शोभा सिंह की जमीन पर ही है और उसे सर शोभा सिंह स्कूल के नाम से जाना जाता था।

👉 खुशवंत सिंह ने अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर अपने पिता को एक देशभक्त, दूरद्रष्टा और निर्माता साबित करने की भरसक कोशिश की।

👉 खुशवंत सिंह ने खुद को इतिहासकार भी साबित करने की भी कोशिश की और कई घटनाओं की अपने ढंग से व्याख्या भी की।

👉 खुशवंत सिंह ने भी माना है कि उसका पिता शोभा सिंह 8 अप्रैल 1929 को उस वक्त सेंट्रल असेंबली मे मौजूद था जहां भगत सिंह और उनके साथियों ने धुएं वाला बम फेंका था।

👉 बकौल खुशवंत सिह, बाद में शोभा सिंह ने यह गवाही दी, शोभा सिंह 1978 तक जिंदा रहा और दिल्ली की हर छोटे बड़े आयोजन में वह बाकायदा आमंत्रित अतिथि की हैसियत से जाता था।

👉 हालांकि उसे कई जगह अपमानित भी होना पड़ा लेकिन उसने या उसके परिवार ने कभी इसकी फिक्र नहीं की।

👉 खुशवंत सिंह का ट्रस्ट हर साल सर शोभा सिंह मेमोरियल लेक्चर भी आयोजित करवाता है जिसमे बड़े-बड़े नेता और लेखक अपने विचार रखने आते हैं, और ………….

👉 बिना शोभा सिंह की असलियत जाने (य़ा फिर जानबूझ कर अनजान बने) उसकी तस्वीर पर फूल माला चढ़ा आते हैं ।

👉आज़ादी के दीवानों क विरुद्ध और भी गवाह थे ……………..

1. शोभा सिंह
2. शादी राम
3. दिवान चन्द फ़ोर्गाट
4. जीवन लाल
5. नवीन जिंदल की बहन के पति का दादा
6. भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दादा

👉दीवान चन्द फोर्गाट DLF कम्पनी का Founder था इसने अपनी पहली कालोनी रोहतक में काटी थी ।

👉इसकी इकलौती बेटी थी जो कि K.P.Singh को ब्याही और वो मालिक बन गया DLF का ।

👉अब K.P.Singh की भी इकलौती बेटी है जो कि कांग्रेस के नेता और गुज्जर से मुस्लिम Converted गुलाम नबी आज़ाद के बेटे सज्जाद नबी आज़ाद के साथ ब्याही गई है । अब वह DLF का मालिक बनेगा ।

👉जीवन लाल मशहूर एटलस साईकल कम्पनी का मालिक था।

🙏 बाकि मशहूर हस्तियों को तो आप जानते ही होंगे ।

👏 ये सन्देश देश को लूटने वाले सभी लोगों तक भी पहुँचना चाहिए, फिर चाहे वो “आप” के हों या पराए ……………..??

WhatsApp के सौजन्य से / साभार उद्धृत

 

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